Jeevan Mein Jyotish जीवन में ज्योतिष (Hindi) by B Krishna
दुनिया में कितनी संस्कृतियां आईं और काल के गाल में समा ग ईं, परंतु भारतीय संस्कृति अपनी पूरी चेतना के साथ खड़ी रही। कभी इसपर गौर किया है कि क्यों? इसका उत्तर है- क्योंकि इसने संस्कारों का साथ नहीं छोड़ा। संस्कार है तो संस्कृति है। इसीलिए भारतवर्ष चिरंजीवी बना हुआ है।
परंतु कालक्रम में हम विकास की डोर पकड़ने के साथ-साथ संस्कारों से दूर होते चले गए हैं। नैतिक मूल्यों को अपनी सुविधानुसार बदलते-गढ़ते हुए उसे छोड़ते चले जा रहे हैं। स्वंय से दूर होते गए, दूसरे के सपनों को स्वंय का सपना समझकर अंधदौर लगाने लगे, अपना कालबोध खोते चले गए… स्वंय की पहचान भूल गए!
परिणाम क्या है? धीरे-धीरे असर करने वाले! कई बार चौंकाने! परंपरा की गहराइयों को समझने के बावजूद असंतुष्ट होने लगे, हम अवसाद के करीब और करीब आते चले गए। कहा- हम अवसाद से ग्रसित होने लगे हैं, मनोवैज्ञानिक रोग से ग्रसित होने लगे हैं।
ऐसे में व्यक्ति का पतन और राष्ट्र की अवनति तो होगी न! व्यक्ति का उत्थान और राष्ट्र की उन्नति का काम तब तक नहीं होगा, जबतक व्यक्ति जागृत नहीं होगा। अपने सत्व और तत्व को नहीं पहचानेगा। अपने भीतर निहित शक्ति का आकलन नहीं कर लेगा। आपस में संवाद नहीं करेगा। विचार विमर्श नहीं करेगा। एकांगी होकर नहीं, बल्कि संपूर्णता और समग्रता में चीजों को देखना आरंभ नहीं करेगा।
प्रत्येक व्यक्ति जागे, स्वंय की शक्ति को पहचाने। अपने सपने देखे और उन सपनों को साकार करने के लिए पूरे होश में पूरी जोश से सह अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए ऊँची छलांग लगाए।
जिस दिन हम अपने भीतर की शक्ति को पहचान लेंगे उसी क्षण से बाह्य परिवर्तन, बाह्य संसाधनों की शुठ्ठि का द्वार खुल जाएगा…!
संपूर्णता और समग्रता में सोचने की कला और देखने का विज्ञान हमें ज्योतिष को जाने बगैर नहीं प्राप्त हो सकता।
अंकगणित में हमें कुछ नियम दिए जाते हैं। जब उन नियमों को हम सही तरीके लागू करते हैं तब सही योग प्राप्त होता है। इन नियमों के बगैर योग को प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि हमें सिर्फ नियम दिए जाएं और अंकगणित के वैसे प्रश्न न दिए जाएं जहाँ वे नियम लगते हैं या फिर हमें अंकगणित के प्रश्न तो दे दिए जाएं पर उनसे सम्बंधित नियम न दिए जाएं, दोनों में किसी एक का अभाव होने से हम प्रश्न को हल नहीं कर सकते। सही योग प्राप्त नहीं कर सकते। अंकगणित को नहीं समझ सकते।
ठीक इसी प्रकार ज्योतिषशास्त्र में भी है। यहाँ भी कुछ नियम हैं जिनके आधार पर हम जीवन के गणित का सही विश्लेषण करते हुए जीवन जीते हैं।
आइये ज्योतिष के माध्यम से संपूर्णता और समग्रता में चीज़ों को देखें…
स्वयं की शक्ति को पहचानें…
स्वयं ही सपने देखें और उन सपनों को पूरा करते हुए श्रेष्ठ समाज और श्रेष्ठ राष्ट्र के निर्माण का द्वार खोलें ..
ज्योतिष के माध्यम से व्यक्ति निर्माण से कहीं आगे जाकर जीवन निर्माण का मेरा यह प्रयास आप सबके समक्ष है। भले ही कोई व्यक्ति कितना ही कम जानता हो, यहां उसके लिए कुछ न कुछ है। इसे हर कोई पढ़ सकता है, और हर कोईई इससे लाभान्वित हो सकता है। यह किताब सभी के लिए है।
अनुक्रम
खंड एक
ज्योतिष बनाम जिंदगी
1. ज्योतिषः एक संक्षिप्त परिचय
2. ज्योतिष और जीवन से जुड़ाव
3. ज्योतिष और कृषि
4. ब्रह्मांड का रहस्य
खंड- 2
ग्रह नक्षत्रः ज्योतिषीय तथ्य
1. शनि की साढ़े साती
2. राहू का कालसर्प दोष
3. सूर्य और चंद्र ग्रहण
खण्ड-3
ज्योतिष में कुंडली महिमा
1. ऐसे करें कुंडली मिलान
2. विवाह और कुंडली
3. मांगलिक प्रभाव
4. षोडश संस्कार
खण्ड-4
ज्योतिषीय उपाय और आयुर्वेद
1. ज्योतिष का उपचारी पहलू ;योग,
आयुर्वेद, मंत्र, यज्ञ, मणि और भेषजद्ध
2. रोग और उपचार
खंड-5
पढ़ाई, प्रतियोगिता और करियर-कारोबार
1. स्वयं की राह का निर्माता
2. विषयों का चयन
3. गणित में रूचि
4. पढ़ाई और प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता
5. इंजीनियरिंग और मेडिकल में करियर
6. छल कपट को कैसे पहचानें
7. व्यसनः मादक द्रव्य का सेवन और भटकाव
खंड-6
ज्योतिष का दर्शन विज्ञान
1. ज्योतिष और योग दर्शन
2. ग्रह शांति
3. मंत्र की महिमा
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